story behind the story
बात एक दशक से पुरानी है, शायद सन 2012 की बात है मेरे एक दोस्त हैं शाह आलम जो एक बड़े चर्चित व्यक्ति हैं, गुमनाम शहीदों को खोजने का काम करते हैं और PCI से जुड़े पत्रकार भी हैं..
दरअसल असल बात ये है कि मेरे पुरखे शाहाबाद से होने की वजह से शाहाबाद से एक अलग ही दिली लगाव है, इसी लगाव के चलते एक दिन मैंने शाह आलम से मुंबई से फोन पर कहा कि यार इतना घूमते रहते हो एक दिन शाहाबाद भी चले जाओ और सुपरस्टार आमिर खान पर एक स्टोरी करो.. मेरी बात सुनकर शाह आलम ने कहा कि आमिर खान का शाहाबाद से क्या लेना देना, तब मैने उन्हें बताया कि उनका शाहाबाद से गहरा जुड़ाव है, उनके पुरखे, उनका पुश्तैनी मकान और उनकी जमीनें और उनका एक बाग़ शाहाबाद के अख्तियारपुर में आज भी मौजूद है..
एक साल के बाद अक्टूबर 2013 में शाह आलम मेरी बहन की शादी में शाहजहांपुर आए थे तब वो मन बनाकर ही आए थे कि शाहजहांपुर से शाहाबाद सिर्फ 30km की दूरी पर है और इस बार आमिर खान पर स्टोरी की जाएगी.. इसी दौरान उन्होंने कहा कि शाहाबाद जाना है और स्टोरी करनी है आमिर खान पर वहां कोई व्यक्ति मिल जाए जो उनकी मदद कर सके ! .. मैंने अपने पुराने दोस्त फ़रहान खान (जो बड़े भाई की तरह हैं मेरे लिए) से बात की और शाह आलम को शाहाबाद के लिए रवाना किया, फ़रहान भाई उनको अख़्तियारपुर लेकर गए और आमिर खान के चचेरे भाईयों से मिलवाया, उनका पुश्तैनी मकान दिखाया, उनके बाग़ में लेकर गए.. शाह आलम ने अख्तियारपुर में अपनी स्टोरी कंप्लीट की और कुछ दिन के बाद वो स्टोरी दैनिक भास्कर में छप कर सामने आई..
यहां ये बताना बहुत जरूरी है कि आमिर खान पर ये पहली स्टोरी की गई थी जिसका सारा श्रेय शाह आलम को जाता है क्योंकि इसके बाद इसी स्टोरी की खूब कॉपी की गई और बात आमिर खान तक पहुंची.. लेकिन पहली स्टोरी शाह आलम की है इसका सुबूत इसी बात से मिलता है कि अख़बार पर तारीख़ भी छपती है और आज तक कोई भी इस तारीख़ से पहले की तारीख़ नहीं दिखा पाया.. ख़ैर...! शाह आलम के साथ ये हमेशा ही होता है कि मेहनत वो करते हैं और मलाई कोई और खा जाता है..
अख़बारों और सोशल मीडिया पर आमिर खान के पुश्तैनी मकान और शाहाबाद से रिश्ता होने की ख़बरें ज़ोरो पर थी और इसी दरमियान जब ख़बरें कुछ ठंडी पड़ीं तो आमिर खान ने शाहाबाद को गोद लेकर एक बार फिर शाहाबाद को सुर्ख़ियों में ला दिया, और लाना भी चाहिए क्योंकि उनकी जड़ें यहां से जुड़ी हुई हैं और ये शाहाबाद के ख़ून में है कि वो जहां जाता है नाम कमाता है.. एक अलग ही तरह की ज़हनियत, रूहानियत और कशिश शाहाबाद के लोगों में होती है ये मैंने फील किया है.. अब कोई ये न कहे कि "शाहबादी बड़े फसादी" 😜
ख़ैर..! आमिर खान साहब ने शाहाबाद को गोद ले लिया है ये सच है.. ये भी सच है कि वक्त भी गुज़र रहा है.. और ये भी सच है कि आमिर खान एक सच्चे और जज़्बाती इंसान हैं क्योंकि वो एक्टर है और एक बेहतरीन काबिल एक्टर और परफेक्शनिस्ट हैं और ये सब तभी आता है जब आदमी अंदर से ईमानदार होता है.. इसलिए मैं आमिर खान से अपील नहीं करूंगा कि वो आएं और जिसको गोद लिया है उसको संभाले-संवारे, क्योंकि शाहाबाद उनका भी है उनके पुरखे यहां दफ़न है.. वो नहीं आयेंगे तो कोई और आयेगा... जैसे आजकल फैसल खान साहब आए हुए हैं..
आमिर खान साहब से ये अपील तो कर ही सकता हूं कि अगर आपके पास वक्त नहीं है तो फैसल खान के माध्यम से ही शाहाबाद के लिए जो करना है वो करने की शुरुआत तो करें.. बाकी पूरा शाहाबाद आपके और आपके परिवार के साथ है क्योंकि शाहाबाद को ताहिर हुसैन - नासिर हुसैन परिवार पर गर्व है... ❤
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